हमारा कार्य सम्पूर्ण समाज के लिए होने के कारण , उसके किसी भी अंग की उपेझा करने से काम नहीं चलेगा। समस्त हिन्दू बांधवों से फिर वे किसी भी श्रेणी में क्यों न हों , हमारा व्यवहार समान रूप से प्रेम का होना चाहिये । किसी भी हिन्दू बन्धू को निम्न समझकर दुत्काना महापाप है।
प. पू. डाॅ. हेडगेवार
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