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प. पू. डाॅ. हेडगेवार जी के विचार
हमारा कार्य सम्पूर्ण समाज के लिए होने के कारण , उसके किसी भी अंग की उपेझा करने से काम नहीं चलेगा। समस्त हिन्दू बांधवों से फिर वे किसी भी श्...
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कभी थे अकेले हुए आज इतने नहीं तब डरे तो भला अब डरेंगे विरोधों के सागर में चट्टान है हम जो टकराएंगे हमसे मौत अपनी मरेंगे लिया ह...
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हमारा कार्य सम्पूर्ण समाज के लिए होने के कारण , उसके किसी भी अंग की उपेझा करने से काम नहीं चलेगा। समस्त हिन्दू बांधवों से फिर वे किसी भी श्...
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ठन गई ! मौत से ठन गई ! झुझने का कोई इरादा न था , मोड पर मिलेगे इसका वादा न था रास्ता रोक कर वो खड़ी हो गई , यों लगा जिंदगी से बड़ी हो गयी ...

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